तांबे की सतह पर कोरोना वायरस चंद मिनटों में ही ख़त्म हो सकता है

अक्सर आपने कई लोगों को तांबे के बर्तन में रखा पानी पीते देखा होगा और लोगों को कहते भी सुना होगा, कि तांबे के बर्तन में रखा पानी, स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद फायदेमंद होता है।

तांबे की ख़ास आणविक बनावट इसको वायरस मारने की अद्भुत क्षमता देती है. कॉपर में इल्क्ट्रोन्स की बहारी कक्षा में फ्री इल्कट्रोन होते हैं जो आसानी से ओक्सिडेशन रिडक्शन की प्रक्रिया में भाग लेते हैं. यही ख़ासियत इस धातु को गुड कंडक्टर (good cunductor)भी बनाती है।

इंगलैंड में माइक्रोबाइलोजी वैज्ञानिक प्रोफेसर बिल कीविल ने तांबे के एंटी माइक्रोबियल प्रभाव पर दो दशक से काम किया है. उन्होने कई 2009 में घातक वायरस मसलन स्वाईन फ्लू (H1N1) और मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (MERS)का अध्य्यन किया था. इसके अलावा भी उन्होने कई शोध किये और हर शोध में पाया की ज़्यादातर वायरस या विषाण्णु कॉपर के संपर्क में आते ही मिनटों में मर जाते हैं।

हाल के दिनों में जब उन्हें ये सुचना दी गई कि कोरोना वायरस (कोविड-19) तांबे की सतह पार आकर चार घंटे से भी ज्यादा जीवित रह सकता है तो वो हैरत में पड़ गए कि ऐसा कैसे संभव है. फिर उन्होंने स्वयं उसके परीक्षण किए उनको पता चला कि तांबे की सतह पर कोरोना वायरस चंद मिनटों में ही ख़त्म हो सकता है।

सुनिए तांबे के गुणों के बारे में क्या कह रहे हैं डॉक्टर जेता सिंह,निदेशक,तपोवर्धन प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र

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