स्पूतनिक V की मंज़ूरी के साथ कोरोना वायरस उन्मूलन की दिशा में भारत नए पड़ाव पर पहुँचा

लैन्सेट अध्ययन के अनुसार कोविड-19 के गंभीर मामलों में स्पूतनिक V 97.6 % सुरक्षा उपलब्ध कराता है

-डॉ. अमीर उल्लाह खान, तेलंगाना सरकार के एमसीआरएचआरडीआई में अर्थशास्त्री और बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउन्डेशन के पूर्व वरिष्ठ सलाहकार 

भारतीय औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) द्वारा स्पूतनिक V को भारत में आपातकालीन उपयोग के लिए तीसरे टीके के रुप में मिली मंजूरी के साथ कोविड 19 के उन्मूलन में भारत एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुँच गया है। आरडीआईएफ (रशियन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फंड) के अनुसार भारत स्पूतनिक V के लिए एक अग्रणी निर्माण केंद्र होगा। रुस में बना यह टीका 60 से ज़्यादा देशों में वैश्विक जनसंख्या के करीब 40 % लोगों के लिए मंज़ूर किया जा चुका है और सरकारी नियामकों द्वारा जारी की गई मंजूरियों के हिसाब से सारी दुनिया में कोरोना वायरस के टीकों में दूसरे क्रमांक पर आता है। रुसी टीके के लिए पंजीकरण कराने वाला भारत सबसे बड़ी जनसंख्या वाला देश है। इससे उन अन्य विदेशी टीकों के भारत में निर्माण का रास्ता खुल हो सकेगा जिन मामलों में आज हमें आपूर्ति से जुड़ी गंभीर समस्या का सामना करना पड़ता है।

कुछ बहुमूल्य समय गंवाने के बाद, अब भारतीय सरकार ने फैसला किया है कि उन कोरोना वायरस टीकों को भारत में आपातकालीन उपयोग के लिए मंज़ूरी दी जा सकती है जिनका निर्माण विदेशों में किया जाता है और जिन्हें यूएस, यूरोप, यूके, जापान में अधिकारियों द्वारा सीमित उपयोग के लिए आपातकालीन मंज़ूरी प्रदान की गई है या जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (डबल्यूएचओ) की आपातकालीन उपयोग सूची में सूचीबद्ध किए गए हैं।

अब तक 14 मिलियन (1.4 करोड) से ज़्यादा (और प्रति दिन करीब 200,000 नए मामले) मामलों के साथ  हम कोविड के सक्रिय मामलों में तेज़ उछाल देख रहे हैं जो इससे पहले कभी नहीं देखी गई। देश के कई हिस्सों में कोवैक्सीन और कोविशील्ड के स्टॉक की भारी किल्लत से जुलाई 2021 तक 300 मिलियन (30 करोड) लोगों का टीकाकरण कराने का सरकार का महत्वाकांक्षी लक्ष्य बुरी तरह प्रभावित हुआ है। यह विडंबना ही है कि टीका लेने में हिचकिचाहट के कारण इसकी मांग को लेकर भी समस्या है। इतना ही नहीं, कई राज्यों में जहाँ लोग टीके की दूसरी खुराक लगवाने का इंतज़ार कर रहे हैं वहाँ निर्धारित समय से टीके की उपलब्धता नही हो पाने की वजह से देरी हो रही है। इन सभी परिदृश्यों को देखते हुए भारत में तीसरे टीके के लिए इससे बेहतर समय नहीं हो सकता था।

दूसरी लहर, हालांकि पूरी तरह अंचंभित करने वाली नहीं होने के बावजूद, जिस तरह नए इलाकों तक पहुँच गई है, वह सभी को उलझन में डाल रही है। जो राज्य पहले संक्रमण के प्रकोप से बचे हुए थे, जैसे कि उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़, वहाँ भी भयावह तरीके से और तेज़ी से वायरस का प्रकोप बढ़ा है। इन राज्यों में स्वास्थ्य प्रणाली पूरी तरह चरमरा गई है और केवल मास्क, सामाजिक दूरी और टीकों के ज़रिए ही संक्रमण से निपटा जा सकता है। ऐसी जगहों में मास्क और शारीरिक दूरी अनिवार्य करना हमेशा मुश्किल रहा है जहाँ पुलिस बल ही एकमात्र पर्याय है जिन्हें वैसे गरीब लोगों को दंड देना पड़ता है जिन्हें यह भी जानकारी नहीं होती कि उनके लिए सावधानी के उपाय बरतना क्यों ज़रुरी है।

इसलिए वायरस का फैलाव रोकने और निश्चित रुप से लोगों को मौत से बचाने के लिए टीकाकरण ही सबसे बेहतर उपाय है। अब तक कुल आबादी के केवल 8% लोगों का टीकाकरण हो पाया है और इससे पहले की सबसे कमज़ोर तबकों का टीकाकरण हो पाए, हमें काफी लंबा रास्ता तय करना है। एक ओर अभी भी टीका लेने के प्रति जबरदस्त अनिच्छा देखी जा रही है और वहीं दूसरी ओर है आपूर्ति श्रृंखला, जो प्रत्येक स्तर पर बाधित है। पिछले साल अपने चरम पर जो स्थिति थी उसकी तुलना में स्टॉक खत्म हो जाना, टीका भंडारण की खराब व्यवस्था, बड़े पैमाने पर टीकों की बर्बादी, खासतौर पर यूपी और तमिलनाडु में, इन सभी ने मिलकर स्थिति को और भी ज़्यादा नाजुक बना दिया है।

रुसी संघ के स्वास्थ्य मंत्रालय और रशियन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फंड के गैमालेया नेशनल रिसर्च सेंटर ऑफ एपिडिमियोलॉजी एंड माइक्रोबायोलॉजी के अनुसार रुस में जिन लोगों को स्पूतनिक V के दोनों घटकों का टीका लगाया गया उनमें कोरोना वायरस के संक्रमण दर पर उपलब्ध डाटा के विश्लेषण के आधार पर स्पूतनिक V 97.6% प्रभावी पाया गया है। एडिनोवायरल वेक्टर पर आधारित टीकों की संरचना और निर्माण तकनीक में उल्लेखनीय अंतर होता है। इसलिए एक टीके के सुरक्षित डाटा को अन्य टीके के सुरक्षित डाटा के संबंधित तथ्यों के आधार पर मूल्यांकन करने की कोई वजह नहीं है। आखिरकार स्पुतनिक V अच्छी तरह अध्ययन किए गए मानव एडिनोवयरल वेक्टर आधारित प्लैटफॉर्म पर आधारित दुनिया का पहला पंजीकृत टीका है। मॉस्को स्थित गैमालेया नेशनल रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडिमियोलॉजी और माइक्रोबायोलॉजी द्वारा विकसित स्पूतनिक V टीके में दो अलग अलग वायरसों का उपयोग किया गया है जो इंसानों में सामान्य ज़ुकाम (एडिनोवायरस) का कारण बनते हैं।

कोविड-19 महामारी की शुरुआत के बाद रुसी वैज्ञानिकों ने नए कोरोनावायरस एसएआरएस-सीओवी-2 के आनुवंशिक सामग्री के अंश को निकाला, जो स्पाइक एस-प्रोटीन की संरचना के बारे में जानकारी कोड करता है और मुख्य वायरस का निर्माण करता है और मानव कोशिकाओं के साथ संबंध के लिए ज़िम्मेदार है। इस सामग्री को दुनिया का पहला कोविड-19 टीका तैयार करने हेतु एक मानव कोशिका में भेजने के लिए एक परिचित एडिनोवायरस वेक्टर में डाला गया। लंबे समय तक टिकने वाली रोग प्रतिरोधक क्षमता सुनिश्चित करने के लिए रुसी वैज्ञानिकों ने पहले और दूसरे टीकाकरण के लिए दो अलग प्रकार के एडिनोवायरस वेक्टर का इस्तेमाल करने की एक क्रांतिकारी आइडिया अमल में लाई जिससे टीके के प्रभाव में बढ़ातरी हुई है। इसलिए कोरोना वायरस के खिलाफ स्पूतनिक V दो-वेक्टर वाला एक टीका है।

आरडीआईएफ के अनुसार स्पूतनिक V के कारण कोई तीव्र दुष्प्रभाव नहीं होते हैं और यह उन व्यक्तियों को टीके के रुप में दिया जा सकता है जो 18 वर्ष या उससे ज़्यादा उम्र के हैं। इस टीके की प्रत्येक 0.5 एमएल की दो खुराक मांसपेशियों में 21 दिनों के अंतराल में दी जाती है। वर्तमान में हमारे देश में जिस तेजी से कोरोना वायरस फैल रहा है इसे देखते हुए यह बहुत ही महत्वपूर्ण है कि भारत में न सिर्फ ज़्यादा टीके उपलब्ध कराए जाएं बल्कि इसके साथ ही इतनी बड़ी जनसंख्या का टीकाकरण करने के लिए ज़्यादा विकल्प भी दिए जाएँ। इसलिए यह एक बहुत बड़ा कदम है कि भारत सरकार ने मौजूदा टीकों के आगे जाकर भी देखने की कोशिश की है और अब कोविड -19 के मामले कम करने और वायरस को फैलने से रोकने के लिए स्पूतनिक V तीसरे टीके के रुप में इस लड़ाई में जुड़ गया है।

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