कोरोना वायरस की भ्रांतियों से बचें

डॉ आशुतोष कुमार दुबे, चिकित्सा अधीक्षक, डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी, सिविल अस्पताल हजरतगंज लखनऊ 

कोरोना वायरस एक बड़े आकार का वायरस है। मास्क को लेकर आज आम आदमी में तरह-तरह की भ्रांतियां हैं। मास्क की जरूरत आमजन को नहीं है, केवल जिन व्यक्तियों को खांसी जुकाम बुखार या मौसमी फ्लू है, वह सामान्य सर्जिकल मास्क, रुमाल, तौलिया या गमछे का प्रयोग करें। जिससे कि अन्य जनों में उनका संक्रमण न फैले। ऐन 95 मास्क की जरूरत ना तो मरीज को है और ना ही  उसके इर्द-गिर्द रहने वाले किसी अन्य ब्यक्ति को है। ऐन 95 मास्क केवल  चिकित्सा कर्मियों अथवा मरीज के नजदीकी तीमारदार को ही पहनना चाहिए। कोरोना वायरस एक साथ नजदीक में रहने वालों में फैलता है। अतः एक क्षेत्र में जहां पर कोरोना का कोई व्यक्ति रह रहा है वहां के लोगों को भयभीत होने की जरूरत नहीं है।

कोरोना वायरस केवल क्लोज कांटेक्ट वाले मनुष्यों में ही फैलता है। कोरोना वायरस का टेस्ट, फ्लू के मरीजों को कराने की आवश्यकता नहीं है। इसकी आवश्यकता केवल उन्हीं लोगों को है जो लोग विगत दिनों में जहां पर कोरोना महामारी बन चुका है वहां की यात्रा की हो या वहां के किसी निवासी के क्लोज संपर्क में रहे हों। मौसमी जुखाम बुखार सामान्यता एक सप्ताह में ठीक हो जाता है। एहतियात के तौर पर वर्तमान मौसम में भीड़भाड़ वाले स्थान जैसे सिनेमाघर, मॉल, ट्रेन, बस की यात्रा, बड़ी आम सभाओं में जाने से बचना चाहिए। जुखाम खांसी बुखार के मरीजों से बात करते समय कम से कम एक मीटर की दूरी बना के रखना चाहिए। सार्वजनिक स्थान के आर्टिकल जैसे रेलिंग, कुंडी, दरवाजे, इत्यादि को छूने के बाद हाथ को साबुन से अच्छी तरह से धुले या अल्कोहल युक्त सैनिटाइजर से साफ करें। अपने चारों तरफ साफ सफाई रखें, पूर्णतया पका एवं स्वच्छ खाना खाए, स्वच्छ जल पिये। अनावश्यक किसी प्रकार के भ्रम में पढ़ने की आवश्यकता नहीं है।
सजग रहें, सतर्क रहें, स्वस्थ रहें।

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