कोरोना वायरस: लॉकडाउन से कैसे प्रभावित हो रहा है बंगलुरु

मनोरमा सिंह

कोविड -19 की वजह से बंगलुरु में जारी लॉकडाउन का असर एक हफ्ता होने से पहले ही महसूस होने के साथ साथ दिखने भी लगा है, आईटी के साथ अन्य सेक्टर की कंपनियों ने भी वर्क फ्रॉम होम का निर्देश दे दिया है। आई टी इनेबल्ड  क्षेत्र की  कई कंपनियों ने 18 मार्च से 24  तक घर से काम करने के निर्देश जारी किए हैं।  लॉकडाउन का असर ये है कि शहर सायं सायं कर रहा है, सड़कें, बाज़ार और गलियां सुनसान हैं, व्यस्ततम आउटर रिंग रोड पर पीक टाइम के ट्रैफिक में  शनिवार, रविवार या किसी भी मौके पर इतने कम  वाहन नहीं नज़र आते, जहां पंहुचने में डेढ़ घंटे लग रहे थे अब 35 मिनट लग रहे हैं कोई ट्रैफिक अवरोध ही नहीं है…ये देखकर एक डर सा जम रहा है, लगभग  25-30 हज़ार से ज्यादा का वर्कफोर्स घर से काम कर रहा है, इंटरनेट स्पीड और पावर कट अलग कंसर्न है, जबकि  गर्मी के मौसम के कारण  इन दिनों बिजली की मांग और खपत  साल के और महीनों से कुछ ज्यादा है। इसलिए  बेसकॉम द्वारा  1 से 3  घंटे का पावर कट अनिवार्यतः किया जा रहा है,  बेसकॉम हर दिन बिजली नहीं होने की शिकायत के लगभग 6  से 10 हज़ार रिसीव कर रहा है। एक बड़े वर्क फ़ोर्स का अचानक बगैर बुनियादी सहूलियत के इंतज़ाम के घर से काम करना घर से काम करना एक अलग चुनौती है और डेडलाइन पूरा करने में बड़ी बाधा है, जिनके पास पावर बैक -अप है वही डेडलाइन पूरा कर पा रहे हैं।

घर से काम करने की चुनौतियों में महिलाओं के लिए डोमेस्टिक हेल्प का मसला भी अहम  है, कई सोसायटी डोमेस्टिक हेल्प का आना बंद कर रहे हैं और उनके लिए भी पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल कर काम पर पहुंचना आसान नहीं है।  सड़क पर बसें भी कम चल रही हैं।  सहूलियत की हर होम डिलीवरी भी फिलहाल उतनी आसान नहीं है।  धीरे धीरे वो कंपनियां भी वर्क फ्रॉम होम का फैसला कर रही हैं जो हाई कॉन्फिडेंशियल कंटेंट या क्लाइंट के लिए काम करती हैं, ऑफिस में ऐसे ही केवल कुछ जरूरी लोगों की टीम को बुलाया जा रहा है।  संक्रमण से बचने के उपाय के रूप में दफ्तरों में एसी ऑफ रखा जा रहा है, पेडेस्टल फैन आ रहे हैं, कैंटीन, कैफेटेरिया क्लोज हो रहा है, हालात इमरजेंसी की ओर बढ़ रहे हैं। इसके अलावा सार्वजानिक वाहन से दफतर आने वाले कर्मचारियों को भी अनिवार्य रूप से घर से ही काम करने के निर्देश दिए जा रहे है। एक हफ्ते का लॉक डाउन आगे बढ़ता नज़र आ रहा है।

ये संकेत अच्छे नहीं है, भारत का आईटी और आईटी इनेबल्ड सेक्टर 190 बिलियन का है जिसमें लगभग 43 लाख लोग काम करते हैं और वित्तीय वर्ष 2019 -2020 में जिसकी विकास दर  7.5 प्रतिशत रही है। लेकिन  कोविड -19 के कारण  जीडीपी पर बहुत नकारात्मक असर पड़ने वाला है, केवल आईटी और इससे अप्रत्यक्ष जुड़े सेक्टर में ही एक करोड़ से ज्यादा नौकरियां ख़त्म हो सकती हैं। कर्नाटक का आईटी निर्यात 2019 के वित्तीय वर्ष में 1,69,699 करोड़ रुपये रहा है। राज्य में 5,500 से अधिक आईटी या आईटी-सक्षम सेवा कंपनियां हैं। इसके अलावा 750 बहुराष्ट्रीय आईटी कंपनियां हैं जो  5800 करोड़ के आईटी सेवा  निर्यात में योगदान करती हैं। आईटी क्षेत्र 12 लाख से अधिक पेशेवरों को प्रत्यक्ष और 31 लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार देता है। साथ ही राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में भी  25% से अधिक का योगदान देता है जो देश के 15, 500 करोड़ के कुल सॉफ्टवेयर निर्यात का 40% हिस्सा है।  आईटी उद्योग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक कोविड  -19 के कारण अबतक ग्राहकों द्वारा 3 अरब डॉलर के नए अनुबंधों को स्थगित कर दिया गया है। नाम नहीं कोट करने के अनुरोध के साथ आईटी उद्योग से जुड़े वरिष्ठ प्रोफेशनल ने बताया कि आईटी कंपनियां की ताकत उनका वर्कफोर्स है, लॉकडाउन के कारण डिलीवरी एक चुनौती है, यह लम्बा चला तो संभालना मुश्किल होगा।

डेल के एमडी इस डर के बारे में बात करते हुए कहते हैं,  डेल 5 -7 पहले से ही घर से काम करने की सुविधा देता रहा है लेकिन दो -तीन साल से इसे कम कर दिया गया था क्योंकि इससे सौ प्रतिशत परफॉर्मेंस पर असर आ रहा था, कोविड -19 के कारण  घर से काम करने का असर प्रोजेक्ट पूरा करने पर होगा। दूसरी समस्या इस सन्दर्भ में अनिश्चितता को लेकर है, उनके मुताबिक बहुत से प्रोजेक्ट में दफ्तर जाकर काम करना अनिवार्य है ऐसे में इस पर निर्णय का अधिकार मैनेजर को दिया गया है वो अपनी टीम को जरूरत के मुताबिक बुला सकते हैं। लेकिन ये भी सच है कि  प्रोजेक्ट धीमे चल रहे हैं और नए प्रोजेक्ट आ नहीं रहे हैं, इसके कारण नई नियुक्तियों पर भी फिलहाल पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। प्रोजेक्ट नहीं आने की वजह से कर्मचारियों में एक किस्म की असुरक्षा उत्पन्न होती जा रही है , लोग कोरोना से ज्यादा नौकरी नहीं रहने से  डर रहे हैं, आखिर नौकरी नहीं रहेगी तो जीवन कैसे चलेगा। वो कहते हैं, जीवन में पहली बार मैं ऐसे हालात देख रहा हूँ अभी जिसका मूल्यांकन भी नहीं किया जा सकता लेकिन एक क्वाटर भी इसके जारी रहने पर बड़े पैमाने पर नौकरियां ख़त्म होंगी।

वहीं  सॉफ्टवेयर कंपनी वीएम् वेयर में बतौर प्रोजेक्ट हेड काम कर रहे राजीव प्रियदर्शी तो इससे प्रभावित हो चुके हैं, चीन के साथ काम करने वाली उनकी जैसी कई कंपनियों पर असर पिछले दो महीने पहले से ही है, वो सभी प्रोजेक्ट जो चीन के लिए थे रोक दिए गए हैं और उनकी पूरी टीम को अगले महीने रिजाइन करने का नोटिस दे दिया गया है।  जॉब -मार्किट का हाल ये है कि नई नौकरियों के कॉल तक नहीं आ रहे हैं।  राजीव प्रियदर्शी कहते हैं असर  सिर्फ नौकरी पर ही नहीं हुआ है बल्कि लम्बे समय से जिस तरह की आर्थिक सुरक्षा हासिल थी वो भी तबाह हो रही है , गौरतलब है कि कई आईटी कम्पनियों के पैकेज में सैलरी के साथ शेयर भी दिया जाता है जो एक बड़ी रकम और आर्थिक सुरक्षा होती है। लगातार  शेयरों की कीमत में गिरावट के कारण बीते दो हफ्ते में उन्हें खुद बीस -पच्चीस लाख का नुकसान हुआ है जिससे उबरने में काफी वक़्त लगेगा, वो कहते हैं हालात ऐसे हो रहे हैं जैसे फिर से शुरुआत करनी हो। जबकि आईबीएम , जेनपेक्ट जैसी कंपनियां भी हैं जो पहले से ही मंदी से और छंटनी से गुजर रही है आईबीएम  में काम करने वाले एक सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल ने नाम नहीं छापने के अनुरोध के साथ बताया कि कोविड -19 का इस्तेमाल छंटनी के लिए किया जा सकता है।

माइक्रोसॉफ्ट में बतौर कमर्शियल कॉन्ट्रैक्ट मैनेजर काम करने वाले एक कर्मचारी के मुताबिक फिलहाल सर्विस बेस्ड कंपनियों और छोटी आईटी कंपनियों पर पर इसका तुरंत और ज्यादा असर हो रहा है। माइक्रोसॉफ्ट जैसी  प्रोडक्ट आधारित कंपनियों पर अभी  ख़ास असर नहीं हुआ है न ही इसके आउटसोर्सिंग पर फर्क पड़ा है, लोग काम कर रहे हैं , प्रोजेक्ट चल रहे हैं और कोविड-19  के मद्देनज़र जरूरी एहतियात बरते जा रहे हैं। यात्राओं को रोक दिया गया है अगर कोई मैनेजर अपनी टीम के सदस्य पर यात्रा का दवाब डालता  है तो  सदस्य को एचआर के पास जाने के निर्देश हैं। लेकिन साथ में ये वो भी कहते हैं कोरोना का असर हवाई यात्रा,सर्विस सेक्टर, बैंकिंग इस सभी सेक्टर्स पर पड़ रहा है अगर एक क़्वार्टर भी ये जारी रहा तो माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियां भी इसके चपेट में आएंगी क्योंकि इसी सेक्टर के साथ बिज़नेस लिंक्ड हैं। उनके मुताबिक उनके जैसे कोर फंक्शन्स में काम करने वालों के लिए घर से काम करने से कोई फर्क नहीं पड़ता। आप ट्रेवल करिये या नहीं करिये लेकिन आपको टारगेट पूरा करना है,  बिज़नेस यात्राओं के कारण काम और मनोरंजन  दोनों के विकल्प थे अब मनोरंजन नहीं हो सकता। वैसे इससे कंपनी के यात्रा खर्च में बचत जरूर होगी और आगे के लिए  बगैर यात्राओं के काम हो सकता है इस विकल्प को गंभीरता से अपनाया जायेगा। माइक्रोसॉफ्ट पूरी तरह से प्रोडक्ट कंपनी है और चीन जैसे बड़े बाज़ार की मंदी का इसपर इसलिए भी अभी खास असर नहीं हुआ है क्योंकि चीन अपना खुद का सर्च इंजन, सोशल मीडिया और कई तरह के ऐप्प इस्तेमाल करता है। भारत माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों का एक बड़ा बाजार है इसलिए भारत का असर जरूर पड़ेगा।

सॉफ्टवेयर कंपनी वेरिंट सिस्टम्स के एमडी अनिल  चावला मानते हैं कि कोविड -19  ग्लोबल इम्पैक्ट है इसलिए सबपर इसका असर आना ही है। कोरोना के कारण सभी को एक सुरक्षित दायरे में बंद होकर काम करना पड़ रहा है जहां लोगों का एक-दूसरे से संपर्क कम से कम हो। ये अवधि 14 दिन से लेकर महीने भर की भी हो सकती है और इसकी वजह से सबसे पहले बिज़नेस अवरोध उत्पन्न होगा, जिन कंपनियों के पास अपना बिज़नेस कंटीन्यूटी प्लान नहीं है उनपर तुरंत और सबसे ज्यादा असर पड़ेगा, उन्हें बिज़नेस लॉस होगा। लेकिन कर्मचारियों के घर से काम करने की बाध्यता आनेवाले दिनों में ऑनलाइन और वर्चुअल विडिओ और ऑडिओ कॉन्फ्रेंसिंग तकनीकी से जुडी कंपनियों को जरूर फायदा पहुंचाएगी  जैसे माइक्रोसॉफ्ट, सिस्को, ज़ूम इत्यादि, इसके अलावा टेलीकॉम कंपनियों को भी फायदा हो सकता है क्योंकि उन्हें डेटाप्लान और अतिरिक्त बैंडविथ मुहैया कराना होगा, लोग ब्राडबैंड लगाएंगे, डोंगल लेंगे।

कोविड -19 के सन्दर्भ में ही हुई विडिओ कॉन्फ्रेंसिंग ख़त्म कर बात करते हुए  इंफोसिस में बतौर सीनियर प्रोजेक्ट प्रोग्राम मैनज़र काम कर बीएस रमेश कहते हैं , भारत में एक बड़ा वर्कफोर्स 24 घंटे कॉल सेंटर के लिए काम करता है जैसे इनफ़ोसिस और विप्रो अगर इनके दस से बीस हज़ार कर्मचारी को घर से काम करना पड़े तो क्या कंपनी के पास ये विकल्प मुहैया कराने का सपोर्ट सिस्टम है, ये सवाल महत्वपूर्ण है। इंफोसिस में घर से काम करने के बारे में कोई आधिकारिक ईमेल रविवार को  मिला है। दरअसल, इंफोसिस, विप्रो, टीसीएस, एक्सेंचर जैसी सर्विस बेस्ड कंपनियों के लिए घर से काम करने का विकल्प देना उतना आसान नहीं है,डेटा सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ बड़ी संख्या में कर्मचारियों को तकनीकी सपोर्ट यानी ऑफिसियल लैपटॉप और कंप्यूटर मुहैया कराना बड़ी चुनौती है। इंफोसिस जैसी कंपनी में पूरी दुनियां में सवा दो लाख से ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं जिसमें अकेले बंगलुरु में करीब तीस -पैंतीस हज़ार कर्मचारी काम करते हैं। वो बताते हैं इंफोसिस में अभी तक हायरिंग पर कोई असर नहीं हुआ है, वैसे भी ये शुरुआत है अगले कुछ हफ़्तों तक जारी रहने पर शायद असर हो। लेकिन अमेरिका के अपने नागरिकों के एक महीने से भी ज्यादा समय के लिए दूसरे देशों की यात्रा और दूसरे देशों के लोगों को अमेरिका आने पर रोक लगा देने का इंफोसिस जैसी कंपनियों पर बहुत असर पड़ेगा क्योंकि यहां से कर्मचारी ऑनसाइट पोस्टिंग पर भेजे जाते हैं यात्रा पर रोक से भेजना बंद हो जायेगा और  कंपनी के राजस्व पर असर पड़ेगा साथ ही अगर ये ज्यादा लम्बा चला तो जिन लोगों की ऑनसाइट अवधि ख़त्म हो गई है उनके वापस नहीं आने पर उनकी बिलिंग का खर्च कंपनी को उठाना होगा और राजस्व मार्जिन घट जायेगा।

जबकि केंस टेक्नालॉजी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में महाप्रबंधक अजय कुमार के मुताबिक सबसे ज्यादा असर इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर और सेमीकंडक्डर कम्पनीज़ पर होने वाला है क्योंकि चीन इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर निर्माण का सबसे बड़ा केंद्र है, दुनियां के तमाम देशों की कम्पनियाँ इन उत्पादों के लिए चीन पर निर्भर है इस क्षेत्र में दो तरह की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, कोविड-19 के कारण चीन में उत्पादन बुरी तरह से प्रभावित हुआ है तो दूसरी ओर चीन से आयात होकर आने वाली वस्तुओं को बंदरगाहों और एयरपोर्ट पर क्लीयरेंस नहीं मिल रही है और अंततः इसका असर भारत की उन सभी कंपनियों के कामकाज, सर्विस, परफॉर्मेंस और बिज़नेस पर पड़  रहा है ।

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