होली का त्यौहार: सावधानियां और बचाव

डॉ आशुतोष कुमार दुबे, चिकित्सा अधीक्षक, डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिविल अस्पताल हजरतगंज लखनऊ 

होली का त्यौहार भारत का एक प्रमुख त्योहार है। यह त्यौहार बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। इस त्यौहार पर भारत के समस्त नागरिक आपसी बैर और वैमनस्य को भूलकर एक-दूसरे को गले लगा कर रंग लगाते हैं और मिठाइयां बांटते हैं। पर जैसा कि हम सभी लोग जानते हैं, कि हर समाज में हर तरह के व्यक्ति होते हैं इसलिए होली का त्यौहार आते ही मिलावट खोर लोग अधिक मुनाफा कमाने की जुगत में लग जाते हैं और आमजन होली पर इस्तेमाल होने वाले मिलावटी रंग और खानपान से सजग और सतर्क रहने का उपाय ढूंढने में व्यस्त हो जाते हैं। ऐसे में होली का मजा किरकिरा होने लगता है। होली की हुड़दंग में हम अपने वास्तविक स्वरूप को भूल जाते हैं। कोई नशा करता है तो कोई एक दूसरे को परेशान करने के लिए विभिन्न प्रकार के रसायनों का प्रयोग करता है। ऐसे में हम सभी लोगों को अपनी सोच बदलनी होगी, और इस पुनीत पर्व को दूषित होने से बचाना होगा।

रासायनिक रंग से बचें
  • हम सबका हमेशा प्रयास यही होना चाहिए कि होलिका दहन में लकङी के अलावा और कोई ज्वलनशील पदार्थ का प्रयोग न करें। क्योंकि इससे हमारा वातावरण प्रदूषित होगा।
  • हमेशा हर्बल रंग का प्रयोग करें, रासायनिक रंगों का प्रयोग ना करें, क्योंकि रासायनिक रंग जब हमारे शरीर के संपर्क में आता है तो हमें विभिन्न प्रकार से नुकसान पहुंचाता है।
  • रासायनिक रंग यदि बालों में लग जाता है तो बालों की चमक खत्म हो जाती है, रूखापन आ जाता है, डैंड्रफ होने की संभावना बढ़ जाती है और बाल झड़ने लगते हैं।
  • यदि यही रासायनिक रंग हमारी आंख में चला जाता है तो आंख में लाली में आ जाती है, धुंध छा जाती है और अगर ये रंग खुरदरे हुए तो हमारी कार्निया को भी डैमेज कर देते है जो कि आगे चलकर के हमें अंधेपन का शिकार बना देती है।
  • यही रंग यदि हमारे नाक से सांस नली में चला जाता है तो एलर्जी करके दमा पैदा कर देता है जो कि हमारे जीवन में दुश्वारियां बढ़ा देता है।

यदि अधिक रंग लगे हुए हाथ से हम अपने खाने पीने की चीजें उठा कर खा लेते हैं और दुर्भाग्यवश यह रंग हमारी आंतों में पहुंचता है तो हमें गैस्ट्रोएन्टराइटिस, नाजिया, वोमिटिंग, लिवर रोग, गुर्दा रोग और कैंसर होने की भी प्रबल संभावना बन जाती है।

रासायनिक रंग जब हमारी शरीर की त्वचा के संपर्क में आता है तो शरीर पर एलर्जिक रिएक्शन जैसे त्वचा का लाल होना, त्वचा पर चकत्ते पड़ना, त्वचा का रूखापन, एक्जिमा और ल्यूकोडरमा तक पैदा कर सकता है। सोने पर सुहागा तब होता है जब हम शरीर पर लगे हुए रंग को छुड़ाने के लिए विभिन्न प्रकार के रसायनों का प्रयोग करते हैं और शरीर त्वचा को बार-बार रगड़ कर साफ करते हैं, यह हमारी त्वचा के लिए और भी घातक होता है।

कई समस्याएं हम खुद पैदा करते हैं

होली की दुश्वारियां अभी यहीं नहीं खत्म होती हैं। कुछ परेशानियां हम स्वयं पैदा करते हैं, जैसे कि गुब्बारे में रंग भर करके एक दूसरे के ऊपर फेंकना। यही रंग यदि हमारे कान में चला जाता है, तो कान के परदे को नुकसान करके हमें बहरा बना देता है, आंख में चोट पहुँचाता है।
छोटे-छोटे बच्चे घर की छतों की चारदीवारी के ऊपर चढ़ कर रंग खेलते हैं, इस कारण कई बार यह देखा गया है कि बच्चे छत से गिरकर घायल और चोटिल हो जाते हैं।

होली के मौसम में गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों, बुजुर्ग तथा रोगियों को विशेष ध्यान देना पड़ता है।

कैसे सुरक्षित होली मनाएं

होली हमेशा अपने परिचितों के बीच में ही खेलनी चाहिए। जिन्हें रंग पसन्द हो उन्हीं को ही रंग लगाये, किसी से जोर जबरदस्ती न करें। कभी भी किसी की धार्मिक भावनाओं को आहत न करें। अपरिचितों के बीच में होली खेलने पर असहज स्थिति पैदा हो सकती है।

हमेशा प्रयास करें कि होली खेलने से पहले अपने शरीर पर अच्छी तरह से कोई भी तेल या  मास्चराइजर लगा ले। बालों में और चेहरे पर अच्छी तरह से तेल लगा लें। बालों को बांध कर, सर पर कैप लगाएं, या स्कार्फ बांध लें। नाखूनों पर नेल पॉलिश लगाएं। पूरी बांह के मोटे कपड़े पहनना चाहिए, और पैरों में जूते पहनना चाहिए। यदि कॉन्टैक्ट लेंस लगाते है, तो निकाल दे। आंखों पर चश्मा अवश्य लगाना चाहिए।

होली कभी भी सड़क पर नहीं खेलना चाहिए, क्योंकि सड़क पर यातायात होने की वजह से एक्सीडेंट की संभावना अधिक होती है। हमेशा प्रयास करें कि होली घर के अगल-बगल खुले स्थान में या पार्क में खेले जहां पर चोट लगने की संभावना कम होती है।

होली खेलते समय छोटे बच्चों पर अवश्य निगरानी रखें और बच्चों को रंग अपनी ही देखरेख में उपलब्ध कराएं।

कभी भी रासायनिक रंग का प्रयोग न करे।   रासायनिक रंग जब हमारे शरीर की त्वचा के संपर्क में आता है तो शरीर पर एलर्जिक रिएक्शन जैसे त्वचा का लाल होना, चकत्ता पड़ना, त्वचा का रूखापन, एक्जिमा और ल्युकोडेर्मा तक पैदा कर सकता है।

हमेशा अच्छी गुणवत्ता का रंग प्रयोग करें। परमानेंट रंग, वार्निश, पेंट्स और कीचङ, मिर्च पाउडर, पेट्रोल, और एसिड के प्रयोग से हमेशा दूर रहे। पानी में घुलनशील रंग का ही प्रयोग करें। यदि संभव हो तो सूखे रंग और गुलाल से ही होली खेले, गहरे रंग के इस्तेमाल से परहेज करें। सूखे रंगों का प्रयोग करते समय सावधानियां बरतें कि इसमें सिलिका, माईका और एस्बेस्टस ना मिला हो। इस बात को हमेशा ध्यान में रखना चाहिए कि कृत्रिम रंग जो गहरे होते हैं वह अत्यंत नुकसानदायक होते हैं क्योंकि यह ऑक्साइड से बने होते हैं। कृत्रिम रंग में लेड ऑक्साइड, कॉपर सल्फेट, माइका और मेटानिल येलो का प्रयोग नहीं होना चाहिए। क्योंकि ये कैंसर के कारक होते है।

ऑर्गेनिक रंग की पहचान आसान होती है, ये चमकदार नहीं होते हैं, यह हल्के और चिकने होते हैं। इसमें किसी प्रकार की दुर्गंध या पेट्रोलियम की महक नहीं होती है।

गर्भवती महिलाएं ख़ास सावधानी रखें

होली के अवसर पर गर्भवती माताओं को अत्यधिक सजग और सतर्क रहना चाहिए क्योंकि जरा सी लापरवाही से उनके गर्भ में पल रहे बच्चे को अत्यधिक नुकसान हो सकता है। हमेशा प्रयास यह करना चाहिए कि गर्भवती माताएं रासायनिक रंगों से बिल्कुल दूर रहें। होली की हुड़दंग में बिल्कुल न शामिल हो और हमेशा बैठकर ही होली खेलें गर्भवती माताएं कभी भी दौड़ते भागते या चलते हुए होली न खेलें। बालों को बांध कर होली खेलें।

सांस और ह्रदय और सुगर के मरीजों को क्या करने से बचना चाहिए 
  • यदि आप सांस के मरीज हैं तो होली खेलने से पहले नाक, कान, आँख के चारों तरफ तेल या कोई क्रीम अवश्य लगायें और मास्क भी लगाएं। सांस के रोगी सूखे रंगों से होली न खेलें।
  • यदि आप हृदय के रोगी हैं तो अपने खान-पान में अवश्य परहेज रखें। होली पर अत्यधिक नमक और चिकनाई वाली चीजें न खाएं।
  • यदि डायबिटीज के मरीज हैं तो आप अपने खान-पान में नियंत्रण रखें और मीठी (चीनी) चीजों से परहेज करें।
  • होली की खुशी में मरीज कभी अपनी दवा खाना न भूलें। त्योहार के पहले ही अपनी दवाएं घर में रख लें।
होली खेलने के बाद क्या करें

होली खेलने के उपरान्त हमेशा रंग छुड़ाने के लिए ठंडे और ताजे पानी का ही प्रयोग करें। कभी भी गर्म पानी का प्रयोग नहीं करना चाहिए। किसी प्रकार के रासायनिक तत्वों से, रंग को हटाने का प्रयास नहीं करना चाहिए। इससे शरीर की त्वचा को और नुकसान होने की संभावना होती है। हमेंशा प्राकृतिक चीजें जैसे उबटन, तेल या शाफ्ट सोप से ही रंगको साफ करें।

अन्य जरुरी सावधानियां

हमेशा प्रयास करें कि खाने-पीने की चीजें घर में ही बनाएं क्योंकि बाजार में तरह-तरह की रंगीन एवं प्रदूषित मिठाईयां ही मिल रही हैं। जो हमें रोगी बनाती हैं। हमेशा यह भी प्रयास करें कि प्राकृतिक रंग का निर्माण अपने घर में ही करें। यह स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत लाभदायक होगा।

अपने यहां होली में भांग और शराब पीने का प्रचलन है। यह कदाचित उचित नहीं है। दोनों का सेवन करने से हमारा व्यवहार बदल जाता है। ऐसी स्थितियों में कभी-कभी हमें असहज हो कर अपमानित होना पड़ता है अतः होली के अवसर पर सार्वजनिक स्थलों पर भांग और शराब का सेवन नहीं करना चाहिए। यह सामाजिक रूप से और स्वास्थ्य दृष्टि से भी घातक होता है। हमेशा अपने आपको, अपने नियंत्रण में रखें, सामाजिक अनुशासन में बंधे रहे। एक दिन की खुशी के लिए कभी भी अपने 364 दिनों की खुशियों को बर्बाद नहीं करना चाहिए।

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