क्या दिल के मरीज महिलाओं के लिए गर्भवती होना सुरक्षित है?

डॉ. अर्चना धवन बजाज, Gynecologist, Obstetrician & IVF Expert Nurture IVF Centre

हृदय रोगों के संबंध में जागरूकता बढ़ने, उन्नत उपचारों और बेहतर प्रबंधन ने हृदय रोग से पीड़ित महिलाओं को गर्भवती होना सुरक्षित बना दिया है.

एक दशक पहले तक, दिल के मरीज महिलाओं के लिए गर्भवती होना जोखिम भरा था. आज भी, गर्भावस्था के लिए सामान्य स्वस्थ महिलाओं की तुलना में हृदय रोगों वाली महिलाएं अधिक खतरे में हैं. हालांकि, माँ बनने से पहले से पहले उचित चिकित्सा सलाह और परामर्श लेना बेहद जरुरी है.

गर्भावस्था वैसी महिलाओं के लिए असुरक्षित है जिसे कभी  दिल का दौरा पड़ने, व्यायाम करने की क्षमता कम हो, दिल के पंप ठीक से कार्य नहीं करते हों और जो anticoagulant medications का सेवन करती हों.

विगत वर्षों में, मैंने हृदय रोग से पीड़ित कई युवा महिलाओं के मामले देखे हैं. और ये सभी महिलाएं  बिना किसी बड़ी जटिलताओं के माँ बनने में सफल हुई हैं.

अध्ययनों से यह भी पता चलता है कि एक दशक पहले की तुलना में गर्भावस्था के दौरान हृदय रोग से पीड़ित महिलाओं की मृत्यु पहले की तुलना में काफी कम हो रही है.

हम हमेशा यही सलाह देते हैं कि माँ बनने से पहले दिल के मरीज महिलाओं को उचित चिकित्सा परामर्श जरुर लेना चाहिए. इससे फायदा ये होता है कि वो महिलाएं जो वाकई वाकई गंभीर दिल की बीमारी से पीड़ित है, और जिन्हें गर्भावस्था के दौरान गंभीर खतरा हो सकता है उन्हें माँ बनने की सलाह नहीं दी जाती है. इसके अलावा, परामर्श बीमारियों के लिए समय पर उपचार शुरू करने में भी मदद करता है ताकि बाद के चरण में ऐसी महिलाओं को एक सामान्य गर्भावस्था हो सके.

यह जानकर आपको बड़ा आश्चर्य होगा कि शहरी क्षेत्रों की तुलना में, ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं में दिल की बीमारियों का खतरा अधिक होता है और यह दिनोदिन खतरनाक रूप से बढ़ रही है.

इसलिए, दिल की बीमारियों के साथ सुरक्षित गर्भावस्था के लिए ग्रामीण भारत में विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है. एक सर्वेक्षण से यह भी पता चला है कि भारत में लगभग 50 प्रतिशत महिलाएं असामान्य कोलेस्ट्रॉल स्तर की समस्या से जूझ रही हैं. भविष्य में उनके हृदय संबंधी रोगों (सीवीडी) के खतरे का यह एक खतरनाक संकेतक है.

  • भारत जैसे देश में हृदय रोग की वजह से गर्भावस्था के दौरान महिलाओं की मृत्यु अभी भी होती है. यह सच्चाई है. विश्व स्तर पर, कुल मातृ मृत्यु का लगभग 15% हृदय रोग की वज़ह से होता है.
  • एक तरफ रक्त की कमी या संक्रमण होने जैसे कारणों मौत कम हो रही है, वहीँ हृदय रोग की वज़ह से मौत बढ़ रही है.

पहले की तुलना में  दिल की बीमारियों से पीड़ित महिलाएं के माँ बनने के ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं. ययह इसलिए संभव हो पाया है क्यूंकि क्योंकि सुधारात्मक सर्जरी ने खतरों को कम कर दिया है. अब विशेषज्ञ बहुत सोच समझ कर ही और बहुत कम मामलों में ही दिल की बीमारी से पीडित महिलाओं को महिलाओं गर्भावस्था से बचने की सलाह देते हैं.

 

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