पांच प्रमुख महिला हस्तियां जो न सिर्फ गंभीर बीमारियों से लड़ने में सफल हुईं बल्कि दूसरों के लिए प्रेरणा स्रोत भी बनी

सोनाली बेंद्रे

बॉलीवुड अदाकारा सोनाली बेंद्रे को 2018 में कैंसर का पता चला था। बीमारी का पता चलने के बाद उन्होंने एक बयान जारी किया था, “कभी-कभी जब आप इसकी बिलकुल ही उम्मीद नहीं करते हैं, तब आपको इम्तिहान देना होता है। मुझे हाल ही में हाई ग्रेड कैंसर का पता चला है जो शरीर में फ़ैल चुका है। कुछ समय तक दर्द झेलने के बाद मैंने जांच करवाई और मुझे इस बीमारी का पता चला। मेरे परिवार के लोगों और करीबी दोस्तों ने मेरा होसला बढाया है। मैं उनमें से प्रत्येक के लिए आभारी हूं।”

उन्होंने ये भी कहा कि “तत्काल इलाज कराने के अलावा इससे इससे निपटने का और कोई बेहतर तरीका नहीं है। और इसलिए, जैसा कि मेरे डॉक्टरों ने सलाह दी है, मैं वर्तमान में न्यूयॉर्क में उपचार के एक कोर्स से गुजर रही हूं। मैं आशावादी बनी हुई हूँ और हर कदम पर लड़ने के लिए दृढ़ हूं। मैं इस लड़ाई से लड़ रही हूँ  यह जानते हुए कि मेरे पीछे मेरे परिवार और दोस्तों की ताकत है।”

सफल इलाज के बाद सोनाली मुंबई वापस आ गई है।

सोनम कपूर

सोनम को 17 साल की उम्र में टाइप -1 डायबिटीज का पता चला था। टाइप -1 डायबिटीज एक ऑटोइम्यून स्थिति है, जहां अग्न्याशय बहुत कम या इंसुलिन बिलकुल पैदा ही नहीं करता है। चूंकि इसमें शरीर इंसुलिन का उत्पादन नहीं कर पाता है, इसलिए ब्लड सुगर को नियंत्रण में रखने के लिए नियमित इंसुलिन इंजेक्शन की आवश्यकता होती है।

इस बीमारी का पता चलने के बाद सोनम ने अपनी जीवन शैली बदल ली. खान पान में बदलाव और नियमित व्यायाम की बदुलत वो एक स्वस्थ जीवन जी रही हैं।

लीसा रे

लिसा रे का जन्म टोरंटो में हुआ था। उनके पिता बंगाली मूल के हैं और माँ पोलिश मूल की हैं।   रे को मल्टीप्ल मायलोमा बीमारी हुआ  था, जो प्लाज्मा कोशिकाओं के रूप में जाना जाने वाला सफेद रक्त कोशिकाओं का एक कैंसर है, जो एंटीबॉडी का उत्पादन करता है। यह एक दुर्लभ बीमारी है। अप्रैल 2010 में, उसने घोषणा की कि वह स्टेम सेल प्रत्यारोपण के बाद कैंसर-मुक्त थी।

मल्टिपल मायलोमा एक तरह का कैंसर है जो ब्लड में होता है क्योंकि ये व्हाइट ब्लड सेल्स को प्रभावित करता है। इन्ही सेल्स को प्लाजमा सेल्स भी कहा जाता है। व्हाइट ब्लड सेल्स हमारे शरीर के लिए इसलिए जरूरी हैं क्योंकि ये बीमारियों और संक्रमण से लड़ने में मददगार होती हैं। इसलिए मल्टिपल मायलोमा एक खतरनाक रोग है क्योंकि इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता तेजी से कम होने लगती है।

अप्रैल 2010 में उन्होंने घोषणा की कि स्टेम सेल प्रत्यारोपण के बाद वो कैंसर-मुक्त जीवन जी रही हैं।

अनुष्का शर्मा

वोग पत्रिका को दिए गए एक साक्षात्कार में, अनुष्का शर्मा ने कहा था: “मुझे घबराहट की बीमारी है। और मैं इस बीमारी का इलाज करवा रही हूं। मुझे इसके लिए दवाई लेनी पड़ती है। मैं यह क्यों कह रही हूं? क्योंकि यह पूरी तरह से सामान्य बात है। यह एक जैविक समस्या है। मेरे परिवार में अवसाद के मामले आए हैं। अधिक से अधिक लोगों को इसके बारे में खुलकर बात करनी चाहिए। इसके बारे में कुछ भी शर्मनाक नहीं है और इसे छिपाने की बिलकुल जरुरत नहीं है। यदि आपको लगातार पेट में दर्द होता था, तो क्या आप डॉक्टर के पास नहीं जाएंगे? एंग्जायटी का इलाज भी इतना ही आसान है। मैं इस बारे में लोगों को शिक्षित करने के लिए प्रयासरत हूँ। ”

किम कार्दशियन

हॉलीवुड स्टार किम कार्दशियन हमेशा से अपनी परफेक्ट फिगर और बोल्डनेस के लिए जानी जाती हैं। मगर 2019 में वो अपनी हैल्थ प्रॉबल्म के लिए चर्चा में आ चुकी थीं। जी हां, ‘कीपिंग अप विद द कार्दशियन’ के सीज़न 17 के प्रीमियर पर 38 साल की रियलिटी स्टार किम ने बताया था कि उन्होंने मेडिकल टेस्ट करवाया है और उन्हें ल्यूपस होने की संभावना है।ल्यूपस एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें हालत बिगड़ जाने पर रोग की सक्रियता अलग-अलग चरणों में सामने आती है। दरअसल, शरीर की रक्षा प्रणाली एंटीबॉडी का उत्पादन करती है जो सूजन के कारण अपने स्वयं के ऊतकों पर हमला करती है। इस बीमारी में हृदय, फेफड़े, गुर्दे और मस्तिष्क भी प्रभावित होते हैं और इससे जीवन को खतरा हो सकता है।हालांकि, इस बीमारी के होने कोई ज्ञात कारक नहीं हैं, मगर माना जाता है कि ल्यूपस धूम्रपान, प्रदूषण और सिलिका धूल जैसे विषैले पदार्थों के संपर्क में रहने से भी यह रोग हो सकता है।

 

 

 

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