दिल्ली से बिहार तक,एंटीजेन टेस्ट पर ही फोकस, ICMR गाइडलाइंस का पालन नहीं

आईसीएमआर गाइडलाइन्स भी कहता है कि एंटीजेन टेस्ट के सभी फॉल्स नेगेटिव टेस्ट्स की जांच आरटी-पीसीआर से की जानी चाहिए। आईसीएमआर गाइडलाइन्स फॉलो नहीं करने का बड़ा खतरा यह है कि एंटीजेन टेस्ट जाँच में फॉल्स नेगेटिव रहे लोगों में अगर संक्रमण हुआ तो उसकी वास्तविक स्थिति सामने नहीं आएगी

COVID19

हाल में दिल्ली में कोविड के नये मामले में बहुत कमी आयी है। वहीं बिहार-यूपी जैसे बढ़े राज्यों में पोजिटिविटी रेट में कमी आयी है। क्या यह कोविड के प्रसार में कमी के संकेत है या जांच में उचित मानक का पालन नहीं करने का असर?
ऐसा इसलिए कहा जा रहा क्योंकि दिल्ली से लेकर बिहार तक सरकार एंटीजेन टेस्ट पर सबसे अधिक फोकस कर रह है।   दिल्ली ने 18 जून से 16 जुलाई के बीच 3 लाख से ज्यादा एंटीजेन टेस्ट किए जिनमें से 2.8 से ज्यादा सैंपल्स नेगेटिव रहे। बिहार में भी एक दिन में 70 हजार से अधिक टेस्ट शुरू हुए तो उसमें 50 हजार एंटीजेन टेस्ट है।
एंटीजेन और आरटी-पीसीआर टेस्ट का अंतर यह है कि दिल्ली में 15 से 30 जुलाई के बीच जो जांच हुए उसमें एंटीजेन टेस्ट में मात्र 7 फीसदी कोविड पोजिटिव पाए गए तो दूसरे टेस्ट में 30 फीसदी तक पोजिटिव पाए गए। पिछले दिनों हाई कोर्ट ने भी इस ट्रेंड पर चिंता जतायी थी।

काेरोना जांच के लिए ये हैं 4 टेस्ट-
1- RT-PCR
2- ट्रूनेट या सीबीनैट टेस्ट
3-एंटीजन टेस्ट
4-एंटीबॉडी टेस्ट।

इसमें आरटी-पीसीआर टेस्ट को सबसे विश्वसनीय माना गया है।  पूरे विश्व में इस जांच को ही मानक माना गयाा है। इसमें थोड़ा अधिक वक्त और खर्च आता है।19 मई को आईसीएमआर ने कोरोना की जांच के लिए ट्रूनेट या सीबीनैट टेस्ट की मंजूरी दी। इस टेस्ट से पहले टीबी मरीजों की जांच होती थी। यह भी विश्वसनीय मना गया है। जून के महीने में बढ़ते मरीजों की तादाद को देखते हुए एंटीजन टेस्ट को मंजूरी दी। इस टेस्ट का परिणाम कुछ घंटे में आ जाता है। यह सस्ता भी है। अंत में एंटीबॉडी टेस्ट भी जोड़ा गया जिस जांच से पता लगता है कि किसी को  कभी कोरोना हुआ था या नहीं। आरटी-पीसीआर टेस्टिंग के लिए एक खास तरह के महंगे सेट-अप की जरुरत पड़ती है।

क्यों एंटीजेन टेस्ट पर ही फोकस?
सवाल यह है कि सरकार सिर्फ एंटीजेन टेस्ट पर ही अधिक फोकस क्यों दे रही है। क्या देश में सिर्फ जांच की संख्या बढ़ाकर पॉजिटिविटी रेट कम दिखाने के लिए तो ऐसा नहीं किया जा रहा है?  जानकारों के अनुसार बिहार और हर राज्य सरकार को एंटीजेन टेस्ट के साथ-ही-साथ आरटीपीसीआर, ट्रूनेट और सीबीनेट मशीन से जांच की अपनी क्षमता भी बढानी चाहिए और एंटीजेन टेस्ट के सभी फॉल्स नेगेटिव रिजल्ट की आईसीएमआर गाइडलाइन्स के मुताबिक फिर से जांच करनी चाहिए.

ICMR गाइडलाइंस भी कहता है

आईसीएमआर गाइडलाइन्स भी कहता है कि एंटीजेन टेस्ट के सभी फॉल्स नेगेटिव टेस्ट्स की जांच आरटी-पीसीआर से की जानी चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि, एंटीजन टेस्ट वायरल प्रोटीन को तलाशता है। अगर इसकी मौजूदगी है तो व्यक्ति कोरोना पॉजिटिव है। आईसीएमआर गाइडलाइन्स फॉलो नहीं करने का बड़ा खतरा यह है कि एंटीजेन टेस्ट जाँच में फॉल्स नेगेटिव रहे लोगों में अगर संक्रमण हुआ तो उसकी वास्तविक स्थिति सामने नहीं आएगी और वे संक्रमण के करियर बने रहेंगे. और सुरक्षा चक्र बड़ा, मज़बूत और विस्तृत होने की जगह बार-बार टूटता रहेगा। ऐसा तब जब खुद सरकार के आंकड़ों में 70 फीसदी कोविड मरीज बिना लक्षण के होते हैं।

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