पर्सनल हाइजीन: भारतीय उपभोक्ता बाजार की अगली बड़ी संभावना

उपभोक्ताओं का व्यवहार कोविड -19  के बाद काफी हद तक बदल गया है. सबसे बड़ा बदलाव पर्सनल हाइजीन के उत्पादनों की बिक्री में देखा जा रहा है.

सही हाइजीन के बिना स्वस्थ जीवन नहीं जिया जा सकता है.  पर्सनल हाइजीन का ख्याल ना रखने पर बैक्टीरिया और वायरस इम्यून सिस्टम पर हमला करके हमें बीमार बना सकते हैं.

अधिकांश उपभोक्ता एक साथ कई हैंड सैनिटाइज़र की बोतल खरीद रहे हैं. इसे स्वास्थ्य के प्रति सजगता और और रोग नियंत्रण के लिए उपभोक्ताओं द्वारा उठाए जा रहे निवारक कदम लके रूप में देखा जा रहा है.

नीलसन की रिपोर्ट के अनुसार, हैंड सेनिटाइजर सेगमेंट ने नवम्बर जनवरी के 11 प्रतिशत वृद्धि की तुलना में की तुलना में फ़रवरी महीने में 53% की भारी वृद्धि दर्ज की है. मांग में इस अचानक वृद्धि ने हैंड सेनिटाइजर को आउट ऑफ़ स्टॉक कर दिया है.

इसके अलावा, लोगों ने घर में खुद हैंड सेनिटाइजर बनाना शुरू कर दिया है. पर्सनल केयर उत्पादों की बिक्री में हो वृद्धि की वज़ह ई-कॉमर्स प्लेटफार्मों पर इन उत्पादों की उपलब्धता, पर्सनल हाइजीन के प्रति बढ़ रही जागरूकता भी है.

पर्सनल हाइजीन उत्पादों के प्रति उपभोक्ताओं के व्यवहार को बदलने में सोशल मीडिया ने भी सकारात्मक प्रभाव डाला है.

महामारी की आशंका के बीच, नया नए हैण्ड सनितिजर्स लांच किए जा रहे हैं. स्वेट पैड, सेनेटरी नैपकिन, डिस्पोजेबल तौलिए, दस्ताने जैसे उत्पाद खुदरा दुकानों भी उपलब्ध होने लगे हैं.

स्टैटिस्टा के अनुसार, भारत में पर्सनल केयर बाज़ार का कुल साइज़  2019 में $ 11.5 बिलियन डॉलर था जो 2023 तक $15 बिलियन डॉलर तक बढ़ जाने की उम्मीद है.  2019 में सौंदर्य और पर्सनल केयर इंडस्ट्री में अकेले पर्सनल केयर का हिस्सा 46 प्रतिशत था.

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