शारीरिक असक्रियता के साथ आनुवंशिक कारण भी बढ़ाते हैं डायबिटीज, बीपी और कार्डियोवैस्‍कुलर बीमारियों का जोखिम : इंडस हेल्थ प्लस एब्‍नॉर्मैलिटी रिपोर्ट

इंडस हेल्थ प्लस, लोगों को शिक्षित करने और उन्हें जागरूक करने का अभियान चला रहा है, जो मुख्य रूप से सेहत और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से बचाव पर केंद्रित है

विश्व स्वास्थ्य दिवस के मौके पर निवारक स्वास्थ्य देखभाल में अग्रणी, इंडस हेल्थ प्लस ने हेल्थ-चेक के आधार पर एक अध्ययन किया है। इस अध्ययन में यह बात सामने आई है कि शारीरिक असक्रियता, आनुवंशिक जोखिम, तनाव और अस्वस्थ जीवनशैली, डायबिटीज, बीपी और कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों के जोखिम को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं। हर उम्र के लोगों में ये प्रमुख कारण होते हैं। इस अध्ययन के लिये 21000 लोगों का नमूना लिया गया था, जोकि अप्रैल 2021 से मार्च 2022 के बीच निवारक स्वास्थ्य जांच से होकर गुजरे थे।

इंडस हेल्थ प्लस एब्‍नॉर्मैलिटी रिपोर्ट बताती है कि ब्लड शुगर की जांच करवाने वाले 31% लोगों में यह बॉर्डरलाइन पर या प्रीडायिबिटक रेंज में था, उनमे से 30% महिलाएं और 32% पुरुष थे। कुल संख्या के 20% (18% महिला और 22% पुरुष) के लेवल डायबिटिक रेंज में थे। उन्हें डायबेटोलॉजिस्ट/फिजिशियन से परामर्श लेकर अपनी समस्या का प्रबंधन करने की जरूरत है और इसे नियंत्रित रखने के लिये सही भोजन और एक नियमित रूटीन आवश्यक है।

इसके अलावा, कम-घनत्व वाले लिपोप्रोटीन (एलडीएल) के लिये परीक्षण किए गए लोगों में से 31% लोग बॉर्डरलाइन के हाई रेंज में थे, जबकि 40% में 130 मिलीग्राम/डीएल (सामान्य सीमा <100 मिलीग्राम/डीएल) से अधिक पर स्तर था। इसके अलावा, परीक्षण किए गए 26% लोगों में हाई ब्लडप्रेशर था, जिनमें से 13% का सिस्टोलिक ब्लडप्रेशर 140 मिमी एचजी से ऊपर था। हाई ब्लडप्रेशर के लिये परिभाषित कारकों में से एक तब होता है जब सिस्टोलिक ब्लडप्रेशर 130 मिमी एचजी से ऊपर होता है।

अमोल नायकवाड़ी, जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर एवं प्रीवेंटिव हेल्थकेयर स्पेशलिस्ट, इंडस हेल्थ प्लस का कहना है, “नियमित रूप से निवारक जांच और शारीरिक गतिविधियों के साथ सेहतमंद जीवनशैली, किसी भी प्रकार के रोग से लड़ने के लिये दो महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। नियमित रूप से स्वास्थ्य जांच से समय पर रोगों का पता लगाने और उसका इलाज करने में मदद मिल सकती है। भले ही किसी के परिवार में बीमारी की हिस्ट्री रही हो, 25 साल की उम्र के बाद नियमित रूप से जांच करवानी चाहिए। बीमारी या स्वास्थ्य समस्याएं जैसे डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, कार्डियोवैस्कुलर रोग आदि, आनुवंशिक, मनोवैज्ञानिक, पर्यावरणीय और व्यवहारिक कारकों का मिश्रित रूप हैं, जोकि पूरी दुनिया में कई लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं। कहने का मतलब है, हेल्थ-चेकअप और सही जीवनशैली और आनुवंशिक समझ(विभिन्न रोगों के प्रति अपनी आनुवंशिक प्रवृत्ति को जानने से उनकी शुरूआत को रोकने या उसकी गति को कम करने में मदद मिल सकती है), आज की दुनिया में एक स्थायी सेहतमंद जीवन जीने के लिये अहम हो गया है।”

इंडस हेल्थ प्लस, लोगों को शिक्षित करने और उन्हें जागरूक करने का अभियान चला रहा है, जो मुख्य रूप से सेहत और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से बचाव पर केंद्रित है, ताकि युवा पीढ़ी के बीच सेहतमंद जीवन जीने की परंपरा बन पाए। इसके अलावा, यह संस्था इस बात पर काम करती है कि जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के खर्च को कम करने का एकमात्र तरीका है निवारक स्वास्थ्य देखभाल (प्रिवेंटिव हेल्‍थकेयर) पर खर्च करना जोकि इलाज पर किए गए खर्च की तुलना में महज एक तिहाई होता है।

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